Thursday, September 27, 2018

राज्य दे सकते हैं प्रमोशन में आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट

त्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुप्रीम कोर्ट के प्रमोशन में आरक्षण पर दिए फ़ैसले की तारीफ़ की है.
मायावती ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया है.
उन्होंने केंद्र सरकार से राज्यों में प्रमोशन में आरक्षण, सख़्ती से लागू करने की माँग की हैमायावती ने कहा कि कोर्ट के फ़ैसले का संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार राज्यों को चिट्ठी लिखे और उनसे इसे लागू करने को कहे.
मायावती ने ये आरोप भी लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने साढ़े चार साल में अभी तक पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर कोई काम नहीं किया.
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के पास अब मौक़ा है कि वो कोर्ट के इस फ़ैसले को ईमानदारी से लागू करवाये.
दरअसल, बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने प्रमोशन में एससी-एसटी के आरक्षण पर फ़ैसला सुनाया, जिसमें कोर्ट ने आरक्षण देने को राज्यों के विवेक पर छोड़ दिया है.र्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकारें चाहें तो वे प्रमोशन में आरक्षण दे सकती हैं. शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की ये अर्ज़ी ख़ारिज कर दी कि एससी-एसटी को आरक्षण दिये जाने में उनकी कुल आबादी पर विचार किया जाए.
कोर्ट ने साथ ही कहा कि प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए सरकार को एससी और एसटी के पिछड़ेपन के आधार पर डेटा जुटाने की जरूरत नहीं है.
शीर्ष अदालत ने नागराज मामले में 2006 में दिए गए अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करने से भी इनकार कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने साल 2006 के फ़ैसले में कहा था, "राज्य को प्रमोशन में आरक्षण के प्रावधान करने से पहले हर मामले में अनिवार्य कारणों, जैसे कि पिछड़ापन, प्रतिनिधित्व में कमी और प्रशासनिक दक्षता की स्थिति को दिखाना होगा."
कोर्ट ने कहा कि ये फ़ैसला सही है और इस पर फिर से विचार करने की ज़रूरत नहीं है. पांच सदस्यों (चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस कूरियन जोसेफ़, जस्टिस रोहिंटन फ़ली नरीमन, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस इंदू मल्होत्रा) वाली संविधान पीठ ने एकमत होकर ये फ़ैसला सुनाया.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर तीख़ा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि ईरान ने पूरे मध्य-पूर्व में 'अराजकता, मौत और विनाश' का माहौल बना रखा है.
ट्रंप ने ये बातें न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 73वें अधिवेशन में कहीं. उन्होंने ईरान से परमाणु समझौता रद्द करने के अपने फ़ैसले का भी बचाव किया.
उन्होंने कहा, "ईरान का नेतृत्व अपने पड़ोसी देशों, उनकी सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान नहीं करता. ईरान के नेता देश के संसाधनों का इस्तेमाल ख़ुद को अमीर बनाने और मध्य-पूर्व में अफ़रा-तफ़री मचाने के लिए कर रहे हैं."
ट्रंप ने ये भी कहा कि उनके प्रशासन ने अमरीका के इतिहास में 'किसी और से ज़्यादा' काम पूरे किए हैं.
उनकी ये बातें सुनकर लोग हंसने लगे.
लोगों की हंसी सुनकर ट्रंप भी हंसे और कहा, "मैंने ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं की थी." इसके बाद ट्रंप ने ज़ोर देकर दुहराया कि अमरीका पहले इतना मज़बूत, अमीर या सुरक्षित कभी नहीं था.
डोनल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के साथ अमरीका के नर्म और चीन के साथ तल्ख़ रवैये का भी बचाव किया.
इन सारी बातों के बावजूद ट्रंप के भाषण का निचोड़ यही था कि वो दुनिया में अमरीका को अपने हिसाब से चलने के अधिकार की वकालत कर रहे थे.
उन्होंने कहा, "मैं हर देश के उसकी परंपराओं, विश्वासों और रीति-रिवाजों को मानने के अधिकारों का सम्मान करता हूं. अमरीका आपको नहीं बताएगा कि आपको कैसे रहना है, कैसे काम करना है या किसकी पूजा करनी है. हम आपसे सिर्फ़ इतना चाहते हैं कि बदले में आप भी हमारी संप्रमुभता का सम्मान करिए."
राष्ट्रपति ट्रंप के भाषण से अगर तुरंत कोई हेडलाइन निकालनी ये होगी कि उत्तर कोरिया के बजाय अब उनका ईरान उनका दुश्मन नबंर वन बन गया है. लेकिन उनके भाषण इसके अलावा और इससे ज़्यादा भी बहुत कुछ था.
पिछले साल ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र और इसके बहुपक्षवाद पर जो चोट की थी, इस साल उसका बड़ा रूप देखने को मिला. संयुक्त राष्ट्र अपने सदस्यों को साथ मिलकर एक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए काम करने की वकालत करता है और ट्रंप इसकी आलोचना करते हैं.
ट्रंप ने अपने भाषण में वैश्विकता की निंदा तो की है, इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट को भी नहीं छोड़ा. ट्रंप के इस बार के भाषण में राष्ट्रवाद और देश की संप्रभुता के लिए उनका प्रेम और उभरकर सामने आया.
ट्रंप के लिए राष्ट्रवाद ही वो एकमात्र रास्ता है जो अमरीका के लोगों के अधिकारों और आज़ादी की रक्षा कर सकता है.
  • उन्होंने चीन पर बौद्धिक संपदा की चोरी का आरोप लगाया. ट्रंप ने कहा कि चीन की ऐसी हरकतों की वजह से ही अमरीका और चीन के बीच 'ट्रेड वॉर' की नौबत आ गई.
  • ट्रंप ने कहा कि अवैध प्रवासियों की वजह से अपराधियों का नेटवर्क बनने में मदद मिलती है और इससे स्थानीय लोगों के लिए मुश्किलें पैदा होती हैं. उन्होंने कहा कि पलायन और प्रवास जैसे मसले अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के हाथों में नहीं दिए जा सकते. ट्रंप ने कहा कि जिन देशों के लोग पलायन करके दूसरी जगहों पर जाते हैं उन्हें अपने लोगों की मदद करनी चाहिए.
  • डोनल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की तीखी आलोचना की और कहा कि वो डब्ल्यूटीओ की ओर से और 'उत्पीड़न' नहीं बर्दाश्त करेंगे.
  • उन्होंने चीन पर बौद्धिक संपदा की चोरी का आरोप लगाया. ट्रंप ने कहा कि चीन की ऐसी हरकतों की वजह से ही अमरीका और चीन के बीच 'ट्रेड वॉर' की नौबत आ गई.
  • उन्होंने वैश्विकता को ख़ारिज किया और 'देशभक्ति' की तारीफ़ की है.
  • ट्रंप ने कहा कि अवैध प्रवासियों की वजह से अपराधियों का नेटवर्क बनने में मदद मिलती है और इससे स्थानीय लोगों के लिए मुश्किलें पैदा होती हैं. उन्होंने कहा कि पलायन और प्रवास जैसे मसले अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के हाथों में नहीं दिए जा सकते. ट्रंप ने कहा कि जिन देशों के लोग पलायन करके दूसरी जगहों पर जाते हैं उन्हें अपने लोगों की मदद करनी चाहिए.

No comments:

Post a Comment