Thursday, August 30, 2018

महाराष्ट्र के तीन गाँवों की एक तस्वीर

वो लड़की नहीं, लड़का थी मेरा! खेती में कंधे से कंधा मिलाकर मेरा साथ देती. लेकिन जब उसकी शादी करनी थी, तभी सारी फ़सल ख़राब हो गई. कुछ नहीं तो मेहमानों को सादा भोजन करवाकर बेटी को एक जोड़ी कपड़ों में तो विदा करना ही था. इतने भी पैसे नहीं बनते थे. कहां से करते शादी? मेरी बच्चियाँ सब सुनती थीं पर कभी हमें एहसास नहीं होने दिया कि वो परेशान हैं. बस एक दिन अचानक चली गयीं”
यवतमाल का पिपरी बुट्टी गांव :
“सब जगह ढूंढा पर मां नहीं मिलीं...फिर गांव के बाहर के कुएं पर गया. वहां देखा कि मां की चप्पल कुएं के बाहर पड़ी थी.
खेती करने से क्या होगा? आपके यहां आने और मेरे बारे में लिखने से क्या होगा? किसी भी चीज़ से क्या होगा? अरे, मेरे घर मुख्यमंत्री आकर चले गए...फिर भी मेरी किसान माँ ने आत्महत्या कर ली. मुख्यमंत्री के आने से जब कुछ नहीं हुआ. फिर किसी भी बात से क्या हो जाएगा?”
यवतमाल का ही वागधा गांव:
“कागज़ों पर हमारा कर्ज़ा माफ़ हो चुका था जबकि असलियत में हम पर अब भी 45 हज़ार कर्ज़ था. जिन माइक्रो फाइनेंस कम्पनियों से हमने कर्ज़ लिया था उनके लोग घर आकर पैसे के लिए मां को सताते थे. मां को दुःख होता पर दुःख से ज़्यादा शर्म आती. अगर शिवाजी स्कीम के मुताबिक़, हमारा पूरा पैसा माफ़ हो जाता तो शायद माँ बच जाती”.
राजधानी दिल्ली से लगभग 1200 किलोमीटर दूर स्थित महाराष्ट्र का अमरावती जिला बीच मानसून की हल्की फुहारों में भीगा हुआ है. चौड़ी सड़कें, चौतरफ़ा हरियाली और राज्य के विदर्भ इलाक़े में पड़ने वाले इस जिले का इंद्रधनुषीय आकाश आपके आसपास ख़ुशहाली का भ्रम रचता है.
लेकिन टीक के पेड़ों और काली मिट्टी के खेतों से सजे यह ख़ूबसूरत रास्ते विदर्भ के जिन गांवों तक जाते हैं, वहां अवसाद और दुख के सिवा कुछ नहीं है. पर विदर्भ के इस दुख के कारणों और इससे जुड़े आंकड़ों में जाने से पहले आइए आप को ले चलते हैं जिले की तिवसा तहसील में बसे शेंदुरजना गांव.
इस गांव में रहने वाले भास्कर और देवकू राव असोडे का घर ढूँढने के लिए हमें ज़्यादा भटकना नहीं पड़ता. गांव का हर बाशिंदा उस किसान के बारे में जानता था, जिसकी 2 जवान बेटियों ने हाल ही में बढ़ते क़र्ज़ के चलते आत्महत्या कर ली थी.
ज़्यादातर पुरुष किसानों की आत्महत्याओं के दस्तावेज़ों से अटी विदर्भ के कृषि विभाग की फ़ाइलों में दर्ज 24 वर्षीय माधुरी और 21 वर्षीय स्वाति की यह कहानी राज्य की ‘किसान बेटियों’ के हिस्से आने वाले संघर्षों की दास्तान है.
कीचड़ भरी एक अंधेरी गली पार करके हम हरी दीवारों वाले एक ऐसे घर के सामने पहुंचते हैं, जिसके मुख्य दरवाज़े पर बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर का एक विशाल पोस्टर चिपका हुआ है.
भीतर दाख़िल होते ही हमारी मुलाक़ात 45 वर्षीय देवकू असोडे से होती है. नारंगी रंग की मटमैली साड़ी पहने अपनी रसोई में बैठी देवकू सब्ज़ी काट रही थीं. हमें देखते ही उन्होंने रोना शुरू कर दिया. एक ग्लास पानी पीने और 5 मिनट की ख़ामोशी के बाद देवकू ने हल्की आवाज़ में बोलना शुरू किया.
दोनों ही बार मुझे अंदाज़ा नहीं हुआ कि मेरी बेटियां ऐसा कुछ कर करने वाली हैं. खेती के लिए हमें कर्ज़ा लेना पड़ा था. कर्ज़ा चुकाने को लेकर तनाव भी रहता है. लेकिन हमने कभी नहीं सोचा था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेंगी”. बेटियों की फ़्रेम करवाई हुई तस्वीरें गोद में लिए बैठी देवकू के गमगीन चेहरे पर रसोई की खिड़की से गिरती धूप पड़ रही थी.
“बड़ी वाली उस दिन बिल्कुल सामान्य थी. उसने सुबह उठकर घर की सफ़ाई की. खाना बनाया. फिर बाल धोकर नहाई और खाना खाया. इसके बाद अचानक शाम के 4 बजे उसने ज़हर (कीटनाशक) खा लिया. तीन महीने के अंदर ही छोटी वाली ने भी ज़हर (कीटनाशक) पी लिया. वह भी पूरे दिन ठीक थी. शाम को टहलने छत पर गयी थी. वहीं उसने ज़हर पी लिया”
कहते कहते देवकू रुआंसी होकर दीवार को देखने लगती हैं. वर्षीय भास्कर राव असोडे बताते हैं कि उनकी बेटियों की मौत के बाद से उनकी पत्नी देवकू डिप्रेशन और मानसिक अस्थिरता का शिकार हो गईं हैं.
भास्कर को अपनी ‘किसान बेटियों’ पर आज भी नाज़ है. लेकिन बेटियों की तस्वीरों पर दर्ज उनकी मौत की तारीखें देखकर बीच-बीच में उनका साहस टूटता भी रहा.
बड़ी बेटी माधुरी को याद करते हुए वह कहते हैं, “वो लड़की नहीं, लड़का थी मेरा! खेती में कंधे से कंधा मिलाकर मेरा साथ देती. बीज लगाने से लेकर रोपाई हो, दवा का छिड़काव या कपास चुनना हो. सारा काम करती थी. उसने मुझे कभी महसूस नहीं होने दिया कि वो मेरी परेशानियों से परेशान है. हमेशा मेरी हिम्मत बँधाती. कहती थी कि पापा सब ठीक हो जाएगा. पर घर के हालात तो सब उसके सामने ही थे.”
इतने कहते-कहते भास्कर फफक फफककर रोने लगते हैं.
इस परिवार के पास अपनी एक एकड़ ज़मीन है. पर उससे गुज़ारा न हो पाने के कारण भास्कर हर साल ज़मीन किराए पर लेकर खेती किया करते थे.
“मैं बरसात और सर्दियों में 4-5 एकड़ ज़मीन मगते (किराए) पर लेकर खेती करता हूं. इस तरह साल में 10 से 12 एकड़ ज़मीन का किराया भरना पड़ता है. एक दो साल तो सब ठीक रहा लेकिन बीते साल जब बड़ी बेटी की शादी करनी थी, तभी सारी फ़सल ख़राब हो गयी”.

Sunday, August 26, 2018

猴年突出濒危物种的困境

一位在壳牌工作了35年的资深员工要求公司将其赖以生存的企业年金从化石燃料领域撤出,并投入清洁能源行业。一位在一家大型石油天然气企业工作的地质科学家辞职后开始参加可再生能源领域的资格考试。这两个故事都是网站的访客们最近留言告诉我的。全球性能源大变革将体现在无数个这样渺小个体的人生故事中。但种种残酷无情的迹象让我们时刻不能忘记那个与我们所有人息息相关的宏大叙事,提醒着我们时间才是最大的敌人。过去两周发生的事情充分说明,巴黎协议之后,挫折将与进步并存。

石油价格如今已经跌破30美元,创下了2013年以来的新低。国际能源署( )警告称,石油市场在2016年可能会“被过剩供给所淹没”。沙特阿拉伯仍在输出,温暖的天气压低了石油的需求,伊朗也随着核问题制裁的终止而重新进入了全球市场……

碳追踪组织(Carbon Tracker)在达沃斯期间向世界经济论坛提交了一份简短的报告,告诫化石燃料生产商无论油价如何,都要正视气候风险。公开宣称后巴黎峰会时期需要能源转型的并非只有我们。普华永道等机构一月份曾警告石油和天然气行业面临搁浅资产风险。方便投资者权衡搁浅资产风险以及其他气候相关负面因素的全面信息披露应该在不远的将来得到实行。在迈克尔·布隆伯格宣布的由其发起的气候风险披露工作组(    )成员名单中,联合利华、安盛、贝莱德和摩根大通等巨头赫然在列。这些机构预计将于今年三月提出若干建议。对于这些建议的大致方向,任何读过《碳战争的胜利》一书最后几章的人应该会有一定了解。

巴黎协议希望能够切实推动资本从化石燃料向清洁能源转移。就这一点而言,以上这些应该都是良好的迹象。根据标普的估计,在巴黎协议条款的推动下,将有16.5万亿美元的投资进入可再生能源、清洁技术和绿色融资领域。国际可再生能源机构(IREA)预计,如果我们为了达成巴黎协议设定的将全球平均气温升高幅度控制在2摄氏度以内的目标而采取一切相应措施,那么到2030年可再生能源在全球能源构成中的比重将达到36%,全球GDP将上升大约1.1%。

一月底的进展报告使我们对这样的发展轨迹有了更强的信心。印度拉贾斯坦邦的太阳能发电成本已经降至每千瓦时6美分的新低,这一价格足以与燃煤和天然气发电相比。可再生能源储存成本的下降也鼓舞人心,世界各地已经投入运行或者正在开发的可再生能源存储能力已经达到300万千瓦,分析机构IHS也因此预测可再生能源储存的部署将迎来迅速的发展期。50多家大型企业已经承诺100%使用可再生能源,他们在达沃斯上宣布已经完成了整体目标的一半。

不过与此同时,威胁巴黎议程达成的因素也越来越多。石油价格下挫导致股价与最近的高点相比下跌了20%以上,从而使许多股票市场跌入熊市。加之全球经济遇到的困难以及对中国发生金融危机的担忧,达沃斯会议笼罩在一丝悲观的气氛之中。一些分析师对全球滑入类似2008年的衰退表示了担忧。

刚刚在巴黎峰会上大获全胜的法国政府正在敦促各国和地区政府保持住气候变化工作上的势头,而下一个目标就是今年四月全球领导人在协议上签字。“我们什么事都做了,但是哪一件事也没做完,”法国气候事务首席外交官洛伦·杜比亚纳表示。她承认,目前尚不确定对于全球经济的担忧将对气候变化工作产生怎样的影响。

一些能源行业现有企业和许多投资者依旧我行我素,似乎什么都没有改变。壳牌收购英国天然气的方案获得了投资者的认可,83%的壳牌投资者在投票中对此动议表示支持。这些产业机构和投资者一定是相信他们可以忽视气候风险和长期低油价带来的风险。带领一千位小投资者对上述交易投反对票的马克·范·巴尔表示:“有更好的方式花掉这500亿美元。我们担心壳牌会成为新的柯达。”

在我的网站上留言的一位壳牌退休员工赞同以上这两点。他曾经是壳牌首位可再生能源业务负责人。

到处都有对石油天然气行业不利的坏消息。42家美国页岩气钻探企业已经破产。从彭博的报道上来看,一些企业的资产甚至白给都没有人要。页岩气开发先驱之一哈罗德·哈姆告诉《金融时报》,企业会彻底停产,因此美国石油产量今年一定会大幅下降。他说,下降的速度可能会让人震惊。

壳牌和其他行业巨头反复重申,天然气从全球变暖的角度看远远优于煤炭。但如今谁还相信这些话呢?10月23日加利福尼亚一口天然气储气井发生了原因不明的大规模泄漏。目前泄露仍然没有得到控制,并已经成为加州对全球变暖的最大贡献。由于这场事故,加州州长已经宣布全州进入紧急状态。这是一个极端的例子,但正如我在书中写道,随着科学家对从气井到终端消费者的整个链条上各个环节天然气泄漏问题研究的深入,得出的结论也越发令人担忧。储气井的监管十分松散,并且美国此前对水力压裂法开采页岩气一直疏于监督。即便最终监管归位,天然气行业的温室气体排放可能仍然会高于煤炭。

即便情况并非如此,巴黎协议要求的“尽可能以最大的雄心”达成1.5摄氏度全球变暖上限的目标意味着要从煤炭直接转向可再生能源而跳过天然气。气候科学家对此已经明确说明。

奥巴马总统一直希望将气候变化作为其任内有意义的政治遗产,并于近期出台监管举措对联邦内石油天然气钻采造成的甲烷排放进行打击。能源产业集团对于施加在它们身上“雪崩式”的监管怨声载道,但奥巴马总统似乎决议推进其气候议题。美国一上诉法庭拒绝将发电厂排除在奥巴马政府的碳排放限制计划之外。另外一位法官最近也裁决,西弗吉尼亚等州“未能满足”暂停奥巴马政府相关监管政策实施所必需的“严格要求”。而在加州,立法者已经投票支持实施一系列措施扩大太阳能市场。

显然,在巴黎协议达成后,世界第二大温室气体排放国正在取得一些成果。世界第一大排放国也是如此。中国2015年的二氧化碳排放量有望降低3%,而分析人士认为这一趋势可能会持续下去。其他积极的行动还包括中国政府宣布将在接下来三年中斥资46亿美元用于关闭4300家煤矿。

然而另外一方面,一些国家正在推行与其在巴黎协议中做出的承诺完全背道而驰的能源政策。英国就是这类国家的典型代表。根据彭博社的报道,由于保守党政府一边积极努力支持页岩气开采与核能,一边撤回对可再生能源和能源效率提高的支持,英国的可再生能源行业面临着“跌落悬崖”的命运。风能补贴的削减意味着英国将在接下来五年里失去至少100万千瓦的可再生电能。RWE出于政策退步的原因宣布废止价值10亿英镑的陆上风能发电投资项目,凸显出英国可再生能源产业的现状。

大卫·卡梅伦政府公布了一系列大手笔的传统能源产业计划,不仅宣布了2.5亿英镑的北海石油天然气产业救助计划,还有意斥巨资促进页岩气开采,并开出一张几十亿英镑的现金支票推动欣克利角C反应堆项目的通过。

与壳牌及其投资者一样,英国政府似乎看不到一些非常明显的不祥之兆。一位保守党议员在其选区的强烈要求下被迫从议会一个受到石油天然气产业资助的页岩气委员会辞职。页岩气开采商将在保守党掌管的郡县遭到怎样的反对从此事中可见一斑,更不用说页岩气开采过程中快速泄漏的甲烷了。

而欣克利角C反应堆项目的来龙去脉就像观看一场慢动作播放的火车事故。有意参与项目运营的EDF公司本应在本月的董事会上完成资金的筹集。由于担心该公司无法筹齐项目所需的几十亿资金,这个决定最终被暂时搁置。 自己的员工也不希望项目继续进行,并公开表示担心这个世界上造价最高的电厂虽然有来自英国和中国政府数十亿的资金支持,仍将难免将EDF公司拖入破产的境地。与此同时,英国政府不仅积极宣传页岩气和核能这种明日黄花式的能源,并且为了让投资者别无选择还大力阻挠清洁能源发展。因此,英国工业联合会警告称全国性电力危机的可能性正在加大。

地球的温度调节器一直在提醒着我们,时间正一分一秒地过去。根据英国气象局统计, 年全球温度远远打破了此前的纪录。美国国家海洋暨大气总署数据显示,全球海洋温度上升的幅度越来越快。德国科学家认为,我们此前低估了海水温度上升造成的海平面升高水平。

最近几个月,气候变化科学对于石油天然气企业来说已经成为了法律责任风险的来源。调查记者发现的证据表明,它们一方面在公开场合用谎言来应对海洋变暖的影响,另一方面——正如我书中写道的那样——私下对基础设施进行加固,使其可以适应海洋变暖的影响。一月,加州检察长对埃克森·美孚公司是否就气候变化对其造成的风险多次向公众及其股东说谎展开了调查。其中重要问题之一便是此类活动是否可以算作证券欺诈。此前,纽约的检察长已经于去年十一月开始对埃克森·美孚公司发起调查,并可能对其提起刑事诉讼。

壳牌也受到质疑。 年,该公司出于对全球变暖造成的海平面升高的担心重新设计了一座价值30亿美元的北海地区天然气开发平台。20世纪90年代,壳牌公司加入全球气候联盟(     ),而这个石油、天然气和煤炭行业游说团体的使命就是缓解公众对于气候变化的关切并阻挠气候谈判。

毫无疑问,在2016年各大石油天然气生产商想尽办法应对气候风险的同时,参与这些企业退休年金的退休职工也会密切地关注局势的动向。而石油天然气企业要应对的风险则是五花八门。即便壳牌500亿欧元收购英国天然气的项目可以在短期内为股东盈利——这在巴黎协议达成后的世界里发生的可能性越来越小——当全世界回首往事都愤然不已之时,肯定存在这些利润最终被法庭罚款和品牌损害抹平的风险。

Wednesday, August 15, 2018

德国将如何影响猪年邮票引发热议年国际气候议程?

去年11月的联合国气候大会召开时,正值美国大选尘埃落定。当特朗普获胜的消息在11月10日传至马拉喀什,与会代表们开始意识到:气候外交需要建立新的领导联盟。世界秩序已经改变,全球的目光开始投向中国。

中国政府能否拯救《巴黎协定》?他会选择谁作为自己的伙伴?中国之星正在冉冉升起,全世界都有目共睹。

几天之后,德国环境部长芭芭拉·亨德里克斯在谈判间隙赞扬了中国在此次峰会上的表现,并表示:“欧盟和中国必须站出来弥补空缺。”

老牌欧洲气候领袖

多年来,德国和包括中国在内的多个国家合作,建立了欧盟碳排放交易体系( )。作为全球首个大型碳交易市场,该体系为欧盟气候变化政策奠定了基础。中国将于今年启动全国碳排放交易计划。即便美国真的退出多边谈判,中德之间的紧密关系也将有助于构建新型气候合作伙伴的基础。

德国不仅是二十国集团(G20)峰会的新一任主席国,还代表《联合国气候变化框架公约》第23次缔约方会议的主办国斐济群岛在波恩组织了此次会议。作为欧洲大国,德国正在寻找一个强大的盟友。

德国政府将于今年9月迎来联邦议会选举,而6月中旬举行的G20峰会若未能取得实质性成果,或将对该国政坛产生重大影响。面对重重压力,德国能否推进其气候议程,建立新的联盟呢?

“气候总理”怎样布置G20峰会议程

一方面,德国以生态保护领导者自居,而安格拉·默克尔也继续在外交谈判中扮演着强有力的角色。如果默克尔把气候问题提上G20的讨论日程,与会各国就不得不重视。此外,适值选举年,政府会尽其所能在全国范围内塑造自己强大的形象,而气候政治向来是一招好棋。

另一方面,德国环境战略带来的变革或许并没有那么彻底;默克尔曾一度被称为“气候总理”,但事实上很多国家在这方面都已经赶超德国。默克尔政府前经济部长(近来被任命为国务秘书)西格玛尔·加布里尔多年来一直对煤炭产业维护有加,甚至在他卸任经济部长一职前的最后一个星期还在反对淘汰煤炭。因此在气候领导方面,德国当局并没有表面上看起来那么强大。

虽然德国联邦环境局( )称,德国需尽快出台具体的方案以淘汰燃煤电站,但西格玛尔·加布里尔却表示自己不想确定具体的淘汰日期。德国目前有超过140座燃煤电站仍在运营中。环境局表示,煤炭淘汰虽极具争议,但如果不这么做,德国就无法实现其在《巴黎协定》中许下的2030年气候目标。近来
政府更是承认,就连2020年的气候目标或许也无法实现。

而美国未来政策的不确定性则是另一大挑战。特朗普上台后,美国可能会彻底背弃先前的气候承诺。

在德国,很多人都在试图游说政府不要主办G20峰会。去年12月,数百名反对者齐聚汉堡举行示威活动。据组织者称,此次活动是汉堡历史上规模最大的示威活动之一。

尽管存在诸多不稳定因素,非政府组织和企业代表组成的联盟预计仍将会推动碳定价的进程,将其作为达成《巴黎协定》气候目标的手段之一。

有“牙齿”的国际碳定价机制

“我们希望德国政府能够把此前已经获得共识的碳定价机制提上G20日程,包括在中长期内逐步提高碳价格。此类国际统一的价格信号能够防止市场主要参与者之间出现恶性竞争,”德国工业联合会(BDI)的霍尔格·廖什说,BDI代表了德国37个行业协会。

德国环境部的一位发言人表示,他们支持全球层面的碳定价,目标是在全球范围内推广这种市场机制,促进国际碳交易市场的“和谐化”。

非政府组织德国观察( )的政治主管、联盟成员克里斯托弗·巴尔斯认为,激进的二氧化碳定价计划有助于揭示温室气体排放的真实成本,可以避免重蹈欧盟碳排放交易体系的覆辙。后者的震慑力过弱,没有对投资决策产生实质性影响。

化石燃料补贴预计是峰会议程上的第二大话题。G20成员国每年花费约4400亿美元支持化石燃料行业,为了在2020年之前彻底淘汰此种补贴,各国面临的
压力也越来越大。

德国科学与政治基金会( )气候专家苏珊·德勒格认为,各国在削减化石燃料补贴上达成承诺的可能性要比出台碳定价机制更高,因为这对大多数国家都更有益。

德国此次主办G20峰会是国际气候政策的推进的机会。气候话题理所当然会排上议程,但主要问题在于,政治领袖们是否会讨论具体行动,而不只是停留在想法层面?之后各国是否会达成一致的决议?现在的不确定因素仍是美国总统特朗普。在6月的峰会召开之前,只有强硬的外交才能确保峰会在气候政策上取得实质性进展。